तमिलनाडु में 'हिंदी थोपने' को लेकर सियासी घमासान, अभिनेता विजय ने भाजपा और डीएमके दोनों को कहा- किंडरगार्टन के बच्चों की तरह लड़ाई!

Update: 2025-02-26 12:02 GMT

चेन्नई तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार के बीच 'हिंदी थोपने' को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर अब अभिनेता से राजनेता बने विजय ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

केजी के बच्चों की तरह लड़ रहे हैं दोनों दल

तमिलगा वेत्री कझगम के प्रमुख विजय ने भाजपा और डीएमके, दोनों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह विवाद 'किंडरगार्टन के बच्चों की तरह लड़ाई' जैसा है। डीएमके ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विजय पर भाजपा से डरने और भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया।

बता दें, कि अगले साल तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव में विजय को संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने भाजपा और डीएमके पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति और तीन-भाषा फॉर्मूले को लेकर दिखावे का टकराव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा और डीएमके दोनों एक सुर में हैं। एक पार्टी गाती है, जबकि दूसरी नाचती है और आम लोगों की चिंताओं को अनसुना किया जा रहा है।

विजय ने राज्य में तीन-भाषा नीति के विरोध को रेखांकित करते हुए कहा कि यह नीति "सहकारी संघवाद की भावना और मौजूदा दो-भाषा नीति के खिलाफ है। डीएमके का दावा है कि इससे तमिल छात्रों को हिंदी सीखने के लिए मजबूर किया जाएगा।

'तमिलनाडु को फंड देना केंद्र की जिम्मेदारी'

विजय ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की उस कथित टिप्पणी पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि "अगर तमिलनाडु सरकार एनईपी को पूरी तरह स्वीकार नहीं करती, तो 2400 करोड़ रुपये की धनराशि रोक दी जाएगी।

वहीं, धर्मेंद्र प्रधान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए डीएमके पर झूठी कहानी गढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एनईपी में कहीं भी यह सुझाव नहीं दिया गया है कि किसी राज्य में कोई भाषा थोपी जाएगी।

विजय ने अपने समर्थकों से #GateOut हैशटैग के तहत इकट्ठा होने का आह्वान किया, जिसका उद्देश्य तमिलनाडु से डीएमके और केंद्र से भाजपा को सत्ता से हटाना है।

विजय की हैशटैग पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनके बेटे व डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी और राज्य को 'भाषा युद्ध' के लिए तैयार बताया।

तमिलनाडु में हिंदी थोपने के मुद्दे पर भाजपा और डीएमके आमने-सामने हैं, वहीं विजय अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दोनों दलों को चुनौती दे रहे हैं।

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