दिल्ली की कुर्सी सरकने के बाद, अब पंजाब की ओर तैयार केजरीवाल... क्या खतरे में है भगवंत की कुर्सी!
नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल को 2024 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी से हार झेलनी पड़ी थी। जिसके ना सिर्फ दिल्ली की गद्दी केजरीवाल के हाथों से निकल गई बल्कि केजरीवाल के पास कोई भी संवैधानिक अधिकार भी नहीं बचा। जिसके बाद कयास लगाए गए थे कि अरविंद अब पंजाब में भगवंत को पीछे रखकर खुद मुख्य तौर पर सामने आएंगे और पंजाब की सारी बागडोर अपने हाथों में लेंगे। खैर वो बात अलग है उस समय केजरीवाल ने इन सभी बातों से इनकार कर दिया था। उन्होंने साफ कर दिया था कि भगवंत मान ही पंजाब के मुख्यमंत्री रहेंगे। लेकिन अब कुछ और ही नजर आ रहा है।
क्या बदल जाएगी पंजाब की तस्वीर
पंजाब में भी फिलहाल वही तस्वीर देखने को मिल रही है, जो एक समय पर कभी कांग्रेस के अंदर सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह की थी। अरविंद केजरीवाल पूरे दमखम से पंजाब में ऐक्टिव नजर आ रहे हैं। अरविंद केजरीवाल की पंजाब में इतनी सक्रियता होने की वजह से मुख्यमंत्री भगवंत मान की भूमिका काफी सीमित लगने लगी है। दरअसल अरविंद केजरीवाल एक बार फिर पंजाब के सुपर सीएम के तौर पर व्यवहार करने लगे हैं। भगवंत मान के लिए फिलहाल अच्छी बात बस इतनी ही है कि अरविंद केजरीवाल ने बोल दिया है कि आम आदमी पार्टी की सरकार में मुख्यमंत्री तो वही रहेंगे। अपने कार्यकाल के भीतर तक भी, और अगला चुनाव जीतने के बाद भी। पंजाब में विधानसभा के चुनाव 2027 में होने हैं।
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद अरविंद केजरीवाल के द्वारा पंजाब के सीनियर अफसरों की एक मीटिंग बुलाई गई थी। जिसके चलते उन्हें विपक्षियों और विरोधियों के द्वारा घेर लिया गया था। तब पंजाब के विपक्षी नेताओं ने केजरीवाल पर दिल्ली से रिमोट कंट्रोल के जरिये पंजाब चलाने का आरोप लगाया था और अरविंद केजरीवाल को पंजाब का सुपर सीएम का टैग दे दिया था। उन दिनों वो दिल्ली के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, लेकिन सारा काम डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के ऊपर ही हुआ करता था।
सोनिया-मनमोहन के रस्ते अरविंद-मान
जिस तरह के लक्षण फिलहाल अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान के बीच देखने को मिल रहे हैं। उसे देखकर तो यही कयास लगाए जा रहे
हैं कि केजरीवाल और भगवंत बिल्कुल कांग्रेस पार्टी में सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के नक्शे कदम पर चल रहे हैं। कहने को मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, लेकिन सत्ता की कुर्सी और निर्णय सोनिया गांधी ही चलाती थी। सोनिया गांधी के दबदबे के चलते मनमोहन सिंह को 'एक्सीडेंटल पीएम' तक करार दिया गया था।
कुछ ऐसा ही हाल भगवंत मान का हो गया है वे कहने भर को ही मुख्यमंत्री रह गये हैं। भले ही भगवंत मान के पास कैबिनेट मीटिंग का अधिकार बरकरार हो, लेकिन बाकी सारी मीटिंग और फील्ड में तो हर जगह अरविंद केजरीवाल ही नजर आ रहे हैं।