Chaitra Navratri: माता कात्यायनी की आराधना से शीघ्र विवाह और मनचाहा जीवनसाथी पाने के बनते हैं योग

Update: 2025-04-03 00:30 GMT

चैत्र नवरात्र। नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा की 6वीं शक्ति मां कात्यायनी की पूजा होती है। शीघ्र विवाह के योग, मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए मां कात्यायनी की पूजा अचूक मानी जाती है।

एक पौराणिक कथा के अनुसार कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे, उनके पुत्र ऋषि कात्य थे। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे और जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने मिलकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन्न किया। ऋषि कात्यायन के यहां जन्म लेने के कारण इन्हें कात्यायनी के नाम से जाना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने मां कात्यायनी की आराधना की थी, इसलिए इन्हें ब्रजभूमि की अधिष्ठात्री देवी कहलाईं गईं।

इनका रंग सोने के समान चमकीला

माता कात्यायनी शेर की सवारी करती है। देवी ने कात्यायनी रूप में ही महिषासुर का वध किया था। इनकी दो भुजाएं अभय मुद्रा और वर मुद्रा में हैं। अन्य दो भुजाओं में खड्ग और कमल है। इनका रंग सोने के समान चमकीला है।

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