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वक्फ बिल पर लोकसभा में भड़के अमित शाह, बोले वक्फ गरीब मुसलमानों के लिए है न कि कब्जे के लिए

DeskNoida
2 April 2025 10:34 PM IST
वक्फ बिल पर लोकसभा में भड़के अमित शाह, बोले वक्फ गरीब मुसलमानों के लिए है न कि कब्जे के लिए
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उन्होंने बताया कि इसमें मंदिरों, अन्य धर्मों, सरकार और अन्य संस्थाओं की जमीनें भी शामिल थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति किसी और की संपत्ति दान नहीं कर सकता, दान वही किया जा सकता है जो स्वयं की हो।

लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वक्फ के तहत दर्ज की गई कई संपत्तियों की सूची प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इसमें मंदिरों, अन्य धर्मों, सरकार और अन्य संस्थाओं की जमीनें भी शामिल थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति किसी और की संपत्ति दान नहीं कर सकता, दान वही किया जा सकता है जो स्वयं की हो।

सरकार का तर्क है कि वक्फ के नाम पर बड़ी मात्रा में भूमि और संपत्तियां कब्जे में ली गई हैं। अमित शाह ने कर्नाटक हाई कोर्ट के एक मामले का हवाला दिया, जिसमें 602 वर्ग किलोमीटर जमीन को कब्जे में लेने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लुटियंस जोन में भी वक्फ के नाम पर सरकारी भूमि को कब्जाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। तमिलनाडु में 400 साल पुराने मंदिर की संपत्ति को वक्फ घोषित कर दिया गया था। इसके अलावा प्रयागराज में स्थित चंद्रशेखर आजाद पार्क सहित कई संपत्तियां वक्फ के दायरे में ला दी गईं।

अमित शाह ने कहा कि संशोधित वक्फ बिल इन सभी मामलों को रोकने में मदद करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून संपत्तियों की रक्षा करेगा, जैसे कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की संपत्तियां, आदिवासी भूमि और निजी संपत्तियां। उन्होंने कहा कि वक्फ के तहत केवल निजी संपत्ति को ही दान किया जा सकता है, न कि गांव या समुदाय की जमीन को।

इससे पहले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि दिल्ली में 1970 से चल रहे एक मामले में पुरानी संसद भवन समेत कई संपत्तियां वक्फ बोर्ड के दावे में आ गई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार ने 123 संपत्तियों को वक्फ बोर्ड को सौंप दिया था। अगर यह संशोधन नहीं लाया जाता तो जिस इमारत में लोकसभा चल रही है, उसे भी वक्फ संपत्ति घोषित किया जा सकता था।

अमित शाह ने यूपीए सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि 2014 के आम चुनाव से ठीक पहले वक्फ से जुड़े नियमों में बदलाव किए गए थे। उन्होंने इसे तुष्टिकरण की राजनीति का एक और उदाहरण बताया और आरोप लगाया कि 2013 में कांग्रेस सरकार ने भूमि कब्जाने से जुड़ी शिकायतों को अदालत में ले जाने का प्रावधान समाप्त कर दिया था।

गृह मंत्री ने बताया कि इस संशोधन को लाने से पहले विभिन्न वर्गों के लोगों से सुझाव लिए गए थे और सरकार को एक करोड़ से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी वोट बैंक के लिए नहीं, बल्कि न्याय के लिए लाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस बिल को केरल के ईसाई समुदाय का भी समर्थन मिला है।

अमित शाह ने सवाल उठाया कि देश में सबसे अधिक वक्फ संपत्ति होने के बावजूद, इनका उपयोग गरीब मुस्लिम समुदाय की शिक्षा, चिकित्सा, कौशल विकास और आय सृजन के लिए क्यों नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ संपत्तियों की आय का दुरुपयोग हो रहा है और विपक्ष चाहता है कि अनियमितताएं जारी रहें।

संशोधित वक्फ बिल में कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसमें केंद्रीय वक्फ परिषद और वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को अनिवार्य रूप से शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, केवल वही व्यक्ति वक्फ को संपत्ति दान कर सकता है, जो कम से कम पांच वर्षों से इस्लाम का पालन कर रहा हो। नए कानून के तहत, यदि कोई सरकारी संपत्ति वक्फ घोषित की गई है, तो अब वह वक्फ के अधिकार में नहीं रहेगी, बल्कि उसका स्वामित्व स्थानीय कलेक्टर द्वारा निर्धारित किया जाएगा।

विपक्ष ने इस बिल को असंवैधानिक बताते हुए इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) और अनुच्छेद 15 (धर्म के आधार पर भेदभाव पर रोक) का उल्लंघन करता है। मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों का मानना है कि ये संशोधन सरकार को वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण देने के लिए किए जा रहे हैं।

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