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फागुनी कविता सम्मेलन : समाज के विभिन्न पहलुओं पर कविताओं की रसधार जमकर बरसी

Neeraj Jha
1 April 2025 1:16 PM IST
फागुनी कविता सम्मेलन : समाज के विभिन्न पहलुओं पर कविताओं की रसधार जमकर बरसी
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दो दर्जन कवियों ने श्रेष्ठ कविताओं से सबका मन मोहा

गाजियाबाद। राज नगर एक्सटेंशन स्थित सिग्नेचर होम्स सोसाइटी क्लब में अखिल भारतीय साहित्य परिषद, महानगर इकाई द्वारा नव सम्वतसर पर आयोजित फागुनी कविता सम्मेलनमें दो दर्जन कवियों ने अपनी श्रेष्ठ बहुमुखी कविताओं के जीवन के अनेक रंग बिखेरे। कविताओं में अंतश्चेतना जगाने की बातें हुईं तो समाज के विभिन्न पहलुओं पर भी कविताओं की रसधार जमकर बरसी।

कविता सम्मेलन का शुभारंभ कार्यक्रम अध्यक्ष सुविख्यात कवयित्री डॉक्टर रमा सिंह, मुख्य अतिथि मशहूर शायर मासूम गाजियाबादी, विशिष्ट अतिथि मशहूर शायर अनिमेष शर्मा ‘आतिश’, नगीना बिजनौर से आये सुपरिचित कवि अनिल नगीना, संस्था के मुख्य संरक्षक सुप्रसिद्ध कहानीकार-उपन्यासकार रवीन्द्र कांत त्यागी, संरक्षक कवि राधेश्याम ‘मधुकर’ और मेरठ प्रांत के महासचिव डाक्टर चेतन आनंद ने मां शारदे के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करके किया। कवयित्री पूजा श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना “मां दुख सभी हरना“ प्रस्तुत की।

कवयित्री संगीता वर्मा ने “मन सागर से कमल नयन में नींद भेद कर लाती हूं“ बेहद सुंदर गीत की प्रस्तुति दी। कवयित्री दीपिका वाल्दिया ने “किन शब्दों से आह्वान करूं“ नवरात्रि विशेष मां की वंदना से सभी को आकर्षित किया। कवयित्री सीमा सागर शर्मा ने “मैं मर्यादा का बंधन हूं “ अपनी सुंदर रचना पढ़ी। कवयित्री शोभा सचान ने “मैं रिश्ता प्यार का निभाने तुमसे आज आई हूं“ बेहद सुंदर गीत पढ़कर सभी श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। कवि गोपाल गुंजन ने होली गीत “कागा ले जा अबीर“ पेश किया। कवयित्री सरिता गर्ग ‘सरि’ ने हिंदू नववर्ष के अवसर पर दोहे पढ़े। कवि राधेश्याम ‘मधुकर’ ने “भावुकता में थके क्षणों का धोखा है ये प्यार नहीं“ रचना सुनाकर तालियां बटोरीं।

संस्था के सचिव कवि अजीत श्रीवास्तव ने “जमाने पर तरस आने लगा है, न जाने किस तरफ जाने लगा है“ ग़ज़ल पढ़कर सभी श्रोताओं का दिल जीता। कवयित्री पूजा श्रीवास्तव ने “स्नेहिल आमंत्रण स्वीकार करो“ रचना पढ़ी। कवि डाक्टर राजीव श्रीवास्तव ने “घूंघट का पट उठाके चंदा झांके मुझमें आ गई ईद“ रचना के माध्यम से ईद की मुबारकबाद पेश की। प्रसिद्ध कवयित्री ममता लड़ीवाल ने “फाग में रंग नहीं उड़ाऊंगी“ गीत से सभी का दिल जीत लिया। कवि मनोज कामदेव ने समाज को आईना दिखाने वाले बेहतरीन दोहे पेश किए। कवि मृत्युंजय साधक ने “टेसू के छंद लिख भेज रहा फागुन“ बेहतरीन फागुन गीत से समां बांध दिया। कवि अनिल नगीना ने “रंगों की होली आई रे“ होली गीत पेश किया।

कार्यकम के विशिष्ट अतिथि मशहूर शायर अनिमेष शर्मा ‘आतिश’ ने “आदमी बनकर हमारे साथ चल कर देखिए“ ग़ज़ल से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मशहूर शायर मासूम गाजियाबादी ने एक से बढ़कर एक शेर पेश किये। उनकी मशहूर ग़ज़ल “यूं भी बचाई हमने गरीबी की आबरू“ को श्रोताओं का खूब प्यार मिला। अखिल भारतीय साहित्य परिषद मेरठ प्रांत के महासचिव, प्रसिद्ध कवि डॉक्टर चेतन आनंद ने अपनी सुप्रसिद्ध रचना “दुख का पिंजरा खोलो मन के पंछी को आजाद करो, अंधियारे से बाहर निकलो, सूरज से संवाद करो“ सुना़कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। संस्था के मुख्य संरक्षक जाने-माने उपन्यासकार श्री रवीन्द्र कांत त्यागी ने सभी की प्रशंसा करते हुए गोष्ठी को बेहद सफल बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही कवयित्री डॉक्टर रमा सिंह ने कई शानदार गीत प्रस्तुत किये। उनकी रचना “झूमते है झूमरों से पात मधु ऋतु आ गई है“ को श्रोताओं ने खूब सराहा। कार्यक्रम का सफल संचालन कवयित्री गरिमा आर्या ने किया। उनके द्वारा प्रस्तुत माहियों ने सभी श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।

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