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ट्रेन से आपात स्थिति में यात्रियों को किस प्रकार सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा ? जानें कैसे परखी गई व्यवस्था

नई दिल्ली। एनसीआरटीसी के लिए यात्री सुरक्षा हमेशा से ही प्राथमिकता रही है और इसे सुनिश्चित करने के लिए नमो भारत ट्रेन और स्टेशनों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं। इसके साथ ही हर प्रकार की आपातकालीन स्थिति में यात्रियों की संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एनसीआरटीसी, समय-समय पर मॉकड्रिल कर सिस्टम और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारियों की जांच करता रहता है। इसी क्रम में, हाल ही में न्यू अशोक नगर और आनंद विहार भूमिगत स्टेशन के बीच यात्री सुरक्षा मॉकड्रिल आयोजित की गईं। इन मॉक ड्रिल्स में नमो भारत ट्रेन की ऑपरेशन टीम, क्विक रेस्पोंस टीम और दमकल विभाग की टीम तैनात रहीं।
आग लगने की आपातस्थिति में यात्रियों को सुरक्षित ट्रेन से बाहर किस प्रकार निकाला जाएगा
इन मॉक ड्रिल में वास्तविक जीवन की आपातकालीन स्थितियों को सिम्युलेट किया गया। किसी भी वजह से आग लगने की आपातस्थिति में यात्रियों को सुरक्षित ट्रेन से बाहर किस प्रकार निकाला जाएगा, इसके लिए मॉकड्रिल्स द्वारा टीम की तैयारियों को परखा गया। न्यू अशोक नगर और आनंद विहार भूमिगत स्टेशन के बीच टनल से गुज़रने के दौरान अगर ट्रेन में आग लगने की आपातस्थिति पैदा होती है तो ऐसी स्थिति में टनल में बनी मिड-वेंटीलेशन शाफ़्ट और टनल में बने क्रॉस-पैसेज की मदद से यात्रियों को तत्काल ट्रेन से सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा। इन मॉकड्रिल्स द्वारा इस पूरी प्रक्रिया और ट्रेन संचालकों, नियंत्रण कक्ष, क्विक रेस्पोंस टीम और अग्निशमन विभाग के बीच समन्वय का मूल्यांकन किया गया - जिसमें त्वरित प्रतिक्रिया, यात्रियों की सुरक्षित और तेज़ निकासी, और आग पर समय रहते काबू पाना सुनिश्चित किया गया।
आपात स्थितियों के लिए प्रतिक्रिया तंत्र को मज़बूत करना है
इन मॉकड्रिल का उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारियों का परीक्षण करना, विभिन्न आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच समन्वय सुदृढ़ करना और आपात स्थितियों के लिए प्रतिक्रिया तंत्र को मज़बूत करना है। उदाहरण के लिए, अगर किसी स्टेशन पर ओएचई टूटने की स्थिति उत्पन्न होती है तो यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए ट्रेन ऑपरेशन स्टाफ व क्विक रेस्पोंस टीम द्वारा एमेरजेंसी ट्रिपिंग स्विच को डाउन कर दिया जाता है। कंट्रोल रूम में लगे इस एमेरजेंसी ट्रिपिंग स्विच को डाउन करके सिस्टम में विद्युत आपूर्ति को रोक दिया जाता है। इस मॉक ड्रिल द्वारा बिजली व्यवधानों को कुशलतापूर्वक संभालने के लिए मानक प्रोटोकॉल को सुदृढ़ किया जाता है।
फ़र्स्ट ऐड का प्रशिक्षण दिया जाता है
इन अभ्यासों से यह सुनिश्चित किया जाता है कि संबंधित टीमें सतर्क रहें, किसी भी संकट की स्थिति में अत्यधिक कुशलता और कम से कम समय में राहत एवं बचाव कार्य करने के लिए तैयार रहें। इसके साथ ही आपातस्थिति की तैयारियों के तहत सभी स्टेशनों पर फर्स्ट ऐड की व्यवस्था भी है। इसके लिए ट्रेन ऑपरेटर्स, ट्रेन अटेंडेंट्स और स्टेशन के अन्य स्टाफ को फ़र्स्ट ऐड का प्रशिक्षण दिया जाता है। ऑपरेशन टीम द्वारा सभी नमो भारत स्टेशनों के नजदीकी हॉस्पिटल्स के साथ समन्वय भी किया गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल मेडिकल सहायता मिल सके।
तैयारियों और सभी सुरक्षा मानकों की जांच करती है टीम
एनसीआरटीसी ट्रेन ऑपरेशन में सेफ़्टी मानदंडों का सख्ती से पालन करती है और समय-समय पर विभिन्न स्टेशनों में सेफ़्टी मॉकड्रिल कर टीम की तैयारियों और सभी सुरक्षा मानकों की जांच करती है। ये मॉकड्रिल्स आपदा प्रबंधन मैनुअल के अंतर्गत लगभग 12 अलग-अलग परिस्थितियों पर आधारित होती हैं। इनमें लिफ्ट फेलियर, स्टेशन पर ओवरक्राउड की स्थिति, भूकंप, ट्रेन का पटरी से उतरना और वायरलेस नेटवर्क फेलियर आदि आधारित मॉकड्रिल्स शामिल हैं।
स्टेशनों की लाइव मॉनिटरिंग की जाती है
नमो भारत स्टेशनों पर भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद यात्रियों को किसी भी दुर्घटना से बचाने के लिए सभी स्टेशनों पर प्लेटफ़ॉर्म स्क्रीन डोर्स (पीएसडी) लगाए गए हैं, ट्रेन और स्टेशनों में यात्रियों की सभी गतिविधियों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी से मॉनिटरिंग की जाती है, स्टेशनों में किसी भी अप्रत्याशित वस्तु के प्रवेश पर रोक के लिए प्रवेश द्वार पर यूपीएसएसएफ एवं सीआईएसएफ द्वारा यात्रियों और समान की कड़ी सुरक्षा जांच और सम्पूर्ण नमो भारत कॉरिडोर पर ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर द्वारा ट्रेनों और स्टेशनों की लाइव मॉनिटरिंग की जाती है, ताकि ट्रेनों और स्टेशनों की पल-पल की खबर रखी जा सके और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल टीमों को एक्शन में लाया जा सके।