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प्रकृति,जीवात्मा एवं ईश्वर को जानकर व्यक्ति होगा सुखी : स्वामी विवेकानंद परिव्राजक आध्यात्मिक प्रवचन,ध्यान एवं शंका समाधन का हुआ शुभारम्भ

गाजियाबाद। आर्य समाज समर्पण शोध संस्थान, राजेन्द्र नगर साहिबाबाद में समाजसेवी जे पी शर्मा की अध्यक्षता में आध्यात्मिक प्रवचन,ध्यान एवं शंका समाधन का भव्य शुभारम्भ हुआ। सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक आचार्य ओमपाल शास्त्री, मास्टर विजेन्द्र आर्य आदि गायकों के ईश भक्ति एवं ऋषि दयानन्द गुणगान को सुनकर श्रोता भाव विभोर हो गए।
स्वामी विवेकानंद परिव्राजक (निर्देशक: दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़,गुजरात) के द्वारा आध्यात्मिक प्रवचन,ध्यान एवं शंका समाधान जिसमें संसार में सुख पूर्वक जीने की चर्चा करते हुए उन्होंने प्रकृति जीवात्मा और ईश्वर तीन सत्ताओं को अनादि बताया अर्थात ये तीनों न तो कभी उत्पन्न होते हैं न ही कभी इनका विनाश होता है। इसमें ईश्वर और जीवात्मा दोनों चेतन हैं और प्रकृति जड़ है। जीवात्मा अल्पज्ञ है,ईश्वर सर्वज्ञ है। ईश्वर ने जीवात्मा के ऊपर दया करके जीवात्मा के भोग और अपवर्ग के लिए जड़ प्रकृति से पूरे संसार की रचना की। प्रकृति तीन तत्वों से मिलकर बनी है सत्व गुण,रजोगुण और तमोगुण।
तीनों गुणों के कारण संसार में सुख, दुख और मूर्खता पाई जाती है
इन तीनों गुणों के कारण संसार में सुख, दुख और मूर्खता पाई जाती है। इस सम्बंध में स्वामी जी ने उपस्थित जनों की शंका का समाधान किया ईश्वर है या नहीं, पुनर्जन्म होता है या नहीं इन सबको प्रमाण सहित समझाया। स्वामी जी ने प्रयोगात्मक रूप का छोटे छोटे वैदिक मंत्रों से परमपिता परमेश्वर का कैसे ध्यान किया जाए,इस वैदिक ज्ञान को सब जनों को प्रदान करने के लिए वैदिक ध्यान का प्रशिक्षण भी दिया ओर ज्ञान मुद्रा की स्थिति में बैठाकर ओम न्यायकारी,ओम न्यायकारी का गुन्जार कराया ओर हे प्रभु आप न्यायकारी हैं,हम भी न्यायकारी बनें,बुलवाया।ओम आनन्द,ओम आनन्द। हे प्रभु आप आनंद स्वरूप हैं,हमें भी आनन्द दीजिए। पश्चात उन्होंने बताया कि इससे बुद्धि का विकास, स्मरण शक्ति,कार्य में एकाग्रता,शरीर मन इंद्रियों पर नियंत्रण,अपने दोषों और बुरे संस्कारों का ज्ञान होता है और उनका नाश भी होता है,अच्छे संस्कार जागृत होते हैं, ईश्वरीय गुणों की प्राप्ति होती है, ईश्वर का प्रत्यक्ष होता है, संसार के सब दुखों से छूटकर आत्मा ईश्वर के नित्यानंद को भोगता है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से सर्वश्री योगी प्रवीण आर्य, के के यादव,देवेन्द्र आर्य (आर्य बंधु), राम पाल चौहान,राज कुमार आर्य, जगदीश सैनी, सत्यवीर सैनी, राहुल आर्य, आशा आर्या, रमेश भटनागर, वेदप्रकाश देवव्रत कुंडू, विनोद गुप्ता, यज्ञ वीर चौहान, टी पी अग्रवाल,प्रताप प्रजापति, सुमन मिश्रा, सुरेश सैनी, वेदवीर राठी,राकेश राणा, खेमचंद शास्त्री एवं श्रीमती कविता राठी आदि उपस्थित रहे। मंच का कुशल संचालन कर रहे जिला मंत्री सुरेश आर्य ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद व्यक्त किया। ऋतम आर्य, यश आर्य व अभय यादव ने सुंदर ऋषि लंगर की व्यवस्था की।